2 साल पहले सुबह की सैर पर निकली तो राह पर जब महिलाओं को छठ पूजा करते देखा कार्यक्रम मे खुद ही चली गई थी। उस वक्त इतना अच्छा लगा कि आज भी खुद को जाने से रोक नहीं पायी। सूर्य की इतनी गहन आस्था भरी पूजा कभी नहीं देखी थी। आप भी ऐसी जगह देख आया कीजिए यकीनन आप भी एक तरह की ऊर्जा और सुकून महसूस करेंगे । पश्चिमी राज्यों में करवा चौथ जैसा प्रसिद्ध है वैसे ही पूर्वी राज्यों में छठ पूजा, बिल्कुल दिवाली के मनिंद। यकीन नहीं होता कि रिस्पना जैसी सूख चुकी प्रदुषित नदी किनारे इतना गहन आस्था का निर्वहन संभव है जैसे कि गंगा किनारे देखते हैं महसूस करते हैं। कुछ दिनों पहले से घाटों की सफाई करवा कर पानी की हौज बनवाना, सुबह सवेरे इस ठंडे मौसम में भी कमर तक ठंडे पानी में खड़े होकर सूरज की प्रतीक्षा कर अर्घ्य देना, वाकई यह पूरबियों कि कठोर मेहनत और परंपराओं के प्रति गहन निष्ठा का प्रमाण है। हमें यह ध्यान देना होगा कि सनातनी धर्म में नदियों के बिना किसी परंपराओं का निर्वहन संभव नहीं । लेकिन अफसोस कि हम नदियों को बचा नहीं पा रहे, मै नहीं खुद तस्वीरें भी कह रहीं है। हालांकि यह बेहद सराहनीय है कि पंजाब-हरियाणा जैसे पश्चिमी राज्यों में सिक्ख पंथी नदी सफाई अभियान चलाते है और यू0पी0, बिहार के पूरबिया भी छठ पूजा से पहले नदी-नहरों के घाट की साफ-सफाई करते है लेकिन तब भी यह संवेदनशीलता सभी पंथो और धर्मों के अनुयायियों में आवश्यक है
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